By | May 12, 2020

आज का इतिहास :- भारत और विश्व में आज के दिन बहुत सी ऐसी प्रमुख ऐतिहासिक घटनायें हुई जिनका जिक्र आज भी इतिहास के पन्नो में किया गया है| आज के इतिहास में हम जोधपुर के बारे में पढेंगे | जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है| राव जोधा ने 12 मई , 1459 ई. में आधुनिक जोधपुर शहर की स्थापना की थी | अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इतिहास से जुड़े प्रश्न  भी पूछे जाते है| प्रत्येक दिन विश्व  में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो की एक महत्वपूर्ण इतिहास (Important History) बन जाता है | जैसे, खेल जगत  में रिकॉर्ड बनना, किसी प्रसिद्द व्यक्ति का जन्म व् मृत्यु, महत्वपूर्ण दिवस, विज्ञान में अविष्कार, शहर या नगर की स्थापना , खास बाते आदि.

  आज के इतिहास में हम जोधपुर के बारे में पढेंगे | जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है| राव जोधा ने 12 मई , 1459 ई. में आधुनिक जोधपुर शहर की स्थापना की थी |

जोधपुर का इतिहास :-

जोधपुर की  जनसँख्या 10 लाख के पार हो जाने पर इसे राजस्थान का दूसरा महानगर घोषित कर दिया था |जोधपुर शहर यहाँ पर ढेरों दुर्गों  , महलों , और मंदिरों के कारण आकर्षण व पर्यटन का स्थल बना हुआ है | प्राचीन काल में यह एतिहासिक रजवाड़े मारवाड़ की राजधानी भी हुआ करता था |

सूर्य नगरी  को वर्ष पर्यन्त चमकते सूर्य वाले मौसम के कारण “सूर्य नगरी” भी कहा जाता है। यहां स्थित मेहरानगढ़ दुर्ग को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे “नीली नगरी” के नाम से भी जाना जाता था। यहां के पुराने शहर का अधिकांश भाग इस दुर्ग को घेरे हुए बसा है|

जिसकी प्रहरी दीवार में कई द्वार बने हुए हैं|
हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस दीवार के बाहर भी नगर का वृहत प्रसार हुआ है।
यहाँ की भौगोलिक स्थिति राजस्थान के भौगोलिक केन्द्र के निकट ही है|
जिसके कारण ये नगर पर्यटकों के लिये राज्य भर में भ्रमण के लिये उपयुक्त आधार केन्द्र का कार्य करता है।

जोधपुर की पहचान :-

जोधपुर सूर्य नगरी के नाम से प्रसिद्ध शहर की पहचान यहां के महलों और पुराने घरों में लगे छितर के पत्थरों से होती है, पन्द्रहवी शताब्दी का विशालकाय मेहरानगढ़ , पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से125  मीटर ऊंचाई पर विद्यमान है। आठ द्वारों व अनगिनत बुजों से युक्त यह शहर दस किलोमीटर लंबी ऊंची दीवार से घिरा है।

सूर्य नगरी जोधपुर सोलहवीं शताब्दी का मुख्य व्यापार केन्द्र, किलों का शहर जोधपुर, अब राजस्थान का दूसरा विशालतम शहर है। पूरे शहर में बिखरे वैभवशाली महल, किले और मन्दिर, एक तरफ जहां ऐतिहासिक गौरव को जीवंत करते हैं वही दूसरी ओर उत्कृष्ट हस्तकलाएं लोक नृत्य, संगीत  और प्रफुल्ल लोग शहर  में रंगीन समां बांध देते हैं।

उपलब्धियां :-

जोधपुर को राजस्थान की न्यायिक राजधानी कहा जाता है, राजस्थान का उच्च न्यायालय  भी जोधपुर में ही स्थित है। जोधपुर पूरे विश्व से जुड़ने के लिये अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा  भी मौजुद है। पूरे राजस्थान  के प्रसिद्ध विभाग जैसे मौसम विभाग , नार्कोटिक विभाग सी बी आइ, कस्टम ,वस्त्र मन्त्रालय आदि मौजूद है।

हस्त शिल्प :-

उत्कृष्ट हस्तशिल्पों  के समृद्ध संग्रह का रंगीन प्रगर्शन देख कर जोधपुर के बाजारों में खरीददारी करना एक उत्साहपूर्ण अनुभव है। बंधेज कला, कशीदाकारी की हुई चमड़े, ऊँट की खाल,मखमल  आदि की जूतियाँ  आकर्षक मकराना के संगमरमर से बने स्मृतिचिन्ह, उपयोगी व सजावटी वस्तुओं की विस्तृत किस्में आदि इन बाजारों में पाई जाती हैं।

जोधपुर में अनगिनत त्योंहारों , समृद्ध अतीत और शाही राज्य की संस्कृति  का उत्सव मनाते हैं। वर्षा में एक बार विशाल पैमाने पर मारवाड़ समारोह  भी मनाया जाता है।

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