उत्तराखंड के 13 जिलों में तस्वीर सवारेंगे 13 उत्पाद, पढ़िए पूरी खबर

केदार दत्त, देहरादून। किसानों की आय में बढ़ोतरी और रोजगार के अवसर सृजित करने के मकसद से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) अब उत्तराखंड में आकार लेने जा रही है। इस कड़ी में ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के तहत सभी 13 जिलों के लिए उत्पाद चयनित कर लिए गए हैं। अब वहां इनसे संबंधित 1591 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की दिशा में कवायद चल रही है। इस पहल से जहां किसानों को बागवानी समेत अन्य उत्पादों का उचित दाम मिलेगा, वहीं प्रसंस्करण इकाइयों के जरिये 20 हजार से अधिक व्यक्तियों के लिए रोजगार के दरवाजे भी खुलेंगे। ये इकाइयां तेजी से आकार लें, इसके लिए राज्य सरकार ने भी अपनी तरफ से उद्यमियों को सात लाख रुपये तक की सब्सिडी देने का निश्चय किया है। योजना में केंद्र से पहले ही 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रविधान है।

केंद्र सरकार ने जब पीएमएफएमई योजना लांच की तो इसके तहत एक जिला एक उत्पाद को लेकर उत्तराखंड में संशय जैसी स्थिति थी। वजह ये कि विषम भूगोल वाले इस राज्य में जिलों में अलग-अलग जलवायु है। मसलन, किसी जिले में मैदानी क्षेत्र है तो कहीं मैदानी, पर्वतीय व घाटी वाले इलाके भी। जाहिर है कि वहां उत्पाद भी क्षेत्रवार अलग-अलग हैं। यह साफ होने पर कि हर जिले में एक उत्पाद का चयन कर इसके लिए सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी तो फिर राज्य सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाए। प्रत्येक जिले के लिए एक उत्पाद का चयन किया गया, जिनमें मशरूम, सेब, बेकरी, फलों का जूस, मसाले, नींबू वर्गीय फल, हल्दी, आम, खुमानी, कीवी, मत्स्य, चौलाई, अदरक से संबंधित उत्पाद शामिल हैं। इनका चयन संबंधित जिलों में इन उत्पादों की अधिकता के हिसाब से किया गया। अब इनसे संबंधित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को कसरत चल रही है। इस पहल से राज्य के 8.82 लाख किसानों को लाभ मिलेगा ही, प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हजारों व्यक्तियों को फायदा पहुंचेगा। बदली परिस्थितियों में इसकी दरकार भी है।

ओडीओपी में चयनित उत्पाद

  • जिला-उत्पाद
  • हरिद्वार- मशरूम (बटन, मिल्की आदि)
  • उत्तरकाशी- सेब (जैली, जैम, चटनी, कैंडी, जूस)
  • देहरादून- बेकरी (बिस्कुट, रस्क, ब्रेड, केक आदि)
  • नैनीताल- फलों का जूस व स्क्वैश (आडू़ आदि)
  • चंपावत- तेजपात व मसाले
  • पौड़ी- नींबू वर्गीय फल (माल्टा, नींबू, गलगल आदि)
  • पिथौरागढ़- हल्दी
  • ऊधमसिंहनगर- आम
  • अल्मोड़ा- खुमानी (जैम, चटनी, अचार आदि)
  • बागेश्वर- कीवी (जैम, चटनी, स्क्वैश, केक आदि)
  • टिहरी- अदरक
  • चमोली- मत्स्य
  • रुद्रप्रयाग- चौलाई (चौलाई के लड्डू आदि)

सुबोध उनियाल (मंत्री, कृषि एवं कृषक कल्याण, उत्तराखंड) ने कहा कि  सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तेजी से स्थापित हों, इस पर सरकार का खास फोकस है। इनमें किसानों के उत्पादों में वेल्यू एडीशन किया जाएगा, जिससे किसानों को फायदा होगा। किसान यदि किसी इकाई को बी व सी ग्रेड का सेब भी उपलब्ध कराते हैं तो उन्हें इसका उचित दाम मिलेगा। प्रसंस्करण इकाइयों में 20 हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार मिल सकेगा। इकाइयों की स्थापना में तेजी के मकसद से राज्य ने भी अधिकतम सात लाख रुपये की सब्सिडी देने का निश्चय किया है। इस प्रकार केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी के साथ ही यह बढ़कर अधिकतम 17 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी।

बासमती, लीची, राजमा को भी दरकार

एक दौर में देहरादून की बासमती और लीची की देश-दुनिया में खासी धाक हुआ करती थी। वक्त के करवट बदलने के साथ ही शहरीकरण के चलते बासमती व लीची की पहचान नेपथ्य में गुम हो चुकी है। इसी तरह चकराता व हर्षिल की राजमा दाल के अलावा अन्य क्षेत्रों के उत्पादों की भी विशिष्ट पहचान रही है। ऐसे में यहां की पहचान से जुड़े इन उत्पादों को लेकर ठोस कवायद न होना और पीएमएफएमई में इन्हें शामिल न करना भी अखरता है। हालांकि, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री का कहना है कि एक जिला एक उत्पाद में बागवानी से संबंधित उत्पादों को तवज्जो दी गई है। बासमती, राजमा जैसे कृषि उत्पादों को प्रोत्साहन व विपणन के मद्देनजर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

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