कोरियाई युद्ध का ‘वॉर हीरो’, Lt Col एजी रंगराज: दक्षिण कोरिया ने करीब 2 लाख सैनिकों का इलाज करने वाले को किया याद

कोरियाई युद्ध की 71वीं वर्षगाँठ पर दक्षिण कोरिया द्वारा भारत के पहले पैराट्रूपर लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज को ‘कोरियन वॉर हीरो फॉर द मंथ’ के रूप याद किया गया। शनिवार (10 जुलाई 2021) को कोरियन वॉर मेमोरियल समेत कई अन्य स्थानों पर रंगराज की तस्वीरों को दिखाया गया। उनकी तस्वीरों को दिखाने का मकसद था कोरियाई युद्ध के दौरान उनके द्वारा योगदान के प्रति आभार प्रकट करना। रंगराज भारतीय सेना के 60वीं पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस के तत्कालीन कमांडर थे और उन्होंने संघर्ष के दौरान अपनी टीम के साथ मिलकर लगभग कोरिया के लगभग 2,00,000 घायलों का इलाज किया था।

कोरियाई युद्ध 25 जून 1950 को प्रारंभ हुआ था। यह संघर्ष काफी उग्र था, जब भारतीय सेना की मेडिकल यूनिट मानवीय आधार पर दक्षिण कोरिया के सैनिकों की सहायता के लिए युद्ध क्षेत्र पहुँची थी। उस समय भारत की 60वीं पैरा फील्ड एम्बुलेंस का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज कर रहे थे। उनके साथ 4 कॉम्बैट सर्जन, 2 एनिस्थीसियोलॉजिस्ट और एक डेन्टिस्ट थे। इस तरह रंगराज की मेडिकल टीम में कुल 346 लोग थे, जिन्होंने कोरियाई युद्ध में घायलों का उपचार किया था।

शनिवार को दक्षिण कोरिया द्वारा एक ऑनलाइन एक्जिबिशन का अनावरण किया गया, जिसका शीर्षक था ‘कोरियन वॉर स्पेशल एक्जिबिशन: 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस’। इस एक्जिबिशन में भारतीय सेना की मेडिकल यूनिट से जुड़ी 32 फोटोग्राफ दिखाई गईं। इन फोटोग्राफ में रंगराज के नेतृत्व में उनकी मेडिकल टीम के सदस्य घाटियों में, जंगलों में, दुर्गम स्थानों में, अस्पतालों में और ऐसे ही संघर्ष के कई क्षेत्रों में दक्षिण कोरिया के सैनिकों का उपचार करते हुए देखे जा सकते हैं। आँकड़ों के मुताबिक, भारतीय सेना की उस मेडिकल टीम ने 3 साल तक चले कोरियाई संघर्ष के दौरान दक्षिण कोरिया के कुल 1,95,000 घायलों का उपचार किया था। इसके अलावा, टीम ने 2,300 सैनिकों की फील्ड सर्जरी भी की थी। इस संबंध में कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया के द्वारा एक वीडियो भी जारी किया गया था।

दक्षिण कोरिया द्वारा भारतीय सेना के प्रयासों को याद करने पर कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया के डायरेक्टर ह्वांग इल यॉन्ग ने कहा, “जब हम संकट में थे तब एक मित्र के रूप में भारत की सहायता और समर्थन को याद करना हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। हम दोनों देशों के युवाओं को यह बताते हुए गर्व महसूस करते हैं। निश्चित तौर पर हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए इतिहास को सँजोया जाना चाहिए और पढ़ाया जाना चाहिए। हम यह आशा करते हैं कि कोरिया और भारत के प्रगाढ़ संबंधों के इस ऐतिहासिक पक्ष में अधिक से अधिक लोग रुचि लेंगे और इसका अध्ययन करेंगे।”

कोरियाई युद्ध:

25 जून 1950 को शुरू हुआ कोरियाई युद्ध 27 जुलाई 1953 तक चला था। इस युद्ध में एक ओर दक्षिण कोरिया था जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका का सहयोग प्राप्त था। दक्षिण कोरिया के खिलाफ इस युद्ध में था उत्तर कोरिया, जिसे चीन और तत्कालीन सोवियत संघ का समर्थन प्राप्त था। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई थी जब उत्तर कोरिया ने सीमाई विवाद के चलते दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया था।

इस युद्ध के परिणामस्वरूप ही कोरियाई विसैन्यीकृत क्षेत्र (Korean Demilitarized Zone) की स्थापना हुई थी। इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने काईसॉन्ग नामक शहर पर अपना अधिकार जमा लिया था लेकिन उसे दक्षिण कोरिया को अपना 3,900 वर्ग किमी का क्षेत्र और सॉकचो शहर सौंपना पड़ा। इस संघर्ष का अंत कोरियन युद्धविराम समझौते के साथ हुआ, जो 27 जुलाई 1953 को साइन किया गया। इस समझौते के अस्तित्व में आने के लिए भी भारतीय प्रयासों को याद किया जाता है, क्योंकि तब भारत हाल ही में स्वतंत्र हुआ एक देश था लेकिन युद्ध विराम के लिए भारत ने पर्याप्त प्रयास किया था।

Updated: October 1, 2021 — 1:50 pm

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