‘कोरोना गाँव में प्रवेश नहीं कर पाएगा, आ गया तो मार नहीं पाएगा’: दरगाह वाले गाँव में वैक्सीन से भाग रहे ग्रामीण

भारत में जहाँ एक ओर सरकार जल्द से जल्द नागरिकों को Covid-19 के संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए टीका लगाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के गडग जिले से एक चिंतित करने वाली खबर आई है। जिले के दावल मलिक गाँव के निवासी कोरोना वैक्सीन लगवाने से यह कहते हुए इनकार कर रहे हैं कि बाबा दावल मलिक की आत्मा उनकी रक्षा कर रही है। गाँव का नाम बाबा दावल मलिक के नाम पर ही रखा गया है और गाँव में ही बाबा दावल मलिक की दरगाह भी है। गुजरात के जुहापुर में भी स्थानीय मुस्लिम अल्लाह के नाम पर टीका लगाने से कतरा रहे हैं।

स्वास्थ्यकर्मी लगातार गाँव के निवासियों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का मानना है कि जिन बाबा दावल मलिक के नाम पर गाँव का नाम पड़ा है उन्हीं की आत्मा गाँव के लोगों को किसी भी बुराई या नुकसान से बचाएगी। गाँव के पास ही बाबा दावल मलिक की दरगाह है जहाँ स्थानीय निवासी लगातार जाते रहते हैं।

मुलगुंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रीत खोना बताती हैं कि ग्रामीणों को टीका लगाने में बहुत कठिनाई हो रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्यकर्मी पिछले चार दिनों से ग्रामीणों को समझने के लिए अवेयरनेस कार्यक्रम चला रहे हैं, लेकिन ग्रामीण सुनने को तैयार ही नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टीका लगवाने में ग्रामीण बहाने बना रहे हैं, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा जोर दिया जाता है तब ग्रामीण कहते हैं कि उन्हें Covid-19 संक्रमण नहीं हो सकता क्योंकि बाबा दावल मलिक उनकी रक्षा कर रहे हैं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक गाँव के एक निवासी ने कहा, “कोरोना वायरस हमारे गाँव में प्रवेश ही नहीं कर पाएगा और यदि आ गया तो हमें मार नहीं पाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हम उसके पास रहते हैं जिसके हजारों की संख्या में अनुयायी हैं और वही हमारी रक्षा करेगा। इसलिए हम टीका नहीं लगवा रहे हैं और सरकार को भी हमारी चिंता करने की जरूरत नहीं है।“

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय निवासी तर्क देते हैं कि बाबा दावल मलिक के कारण गाँव में दरवाजे भी नहीं हैं, लेकिन आज तक यहाँ चोरी नहीं हुई। स्थानीय निवासी यह भरोसा करते हैं कि बाबा दावल मलिक की आत्मा ही उन्हें बीमारियों और तमाम परेशानियों से बचाती है। हालाँकि स्वास्थ्य अधिकारियों का यह भी कहना है कि गाँव वाले टीके लगवाने के एवज में 25,000 हजार रुपए का बीमा या बॉन्ड चाहते हैं।

ऐसा ही एक मामला गुजरात के जुहापुर से आया जहाँ स्थानीय मुस्लिम निवासी कोरोना वायरस के टीका न लगवाने के लिए तरह-तरह के दावे कर रहे हैं। जुहापुर की एक स्थानीय महिला ने दावा किया कि हमारा अल्लाह साथ है और अल्लाह ही उन्हें बचा लेगा। एक दूसरे शख्स ने कहा कि उसे कोरोना हुआ था तब वह ठीक हो गया था, लेकिन यदि वह वैक्सीन लगवाएगा तो उसकी मृत्यु ही हो जाएगी।

कोरोना वायरस को लेकर अक्सर ही उलटे-सीधे बयान आते रहते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा था कि कोरोना कोई बीमारी है ही नहीं। यह एक आसमानी आफत है जो अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाने के बाद ही जाएगी। सपा के ही सांसद एसटी हसन ने भी कहा था कि मोदी सरकार द्वारा मुस्लिमों पर किए गए जुल्म के कारण ही कोरोना बीमारी आई है। ऐसे ही गलतबयानी का असर सामान्य लोगों पर होता है जिसके परिणामस्वरूप दावल मलिक गाँव और जुहापुर जैसे इलाकों से लगातार चिंतित करने वाली खबरें आती रहती हैं।

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