क्यों ‘प्रतिभाओं की फौज’ खड़ी करने वाले राहुल द्रविड़ का एक सीरीज नहीं टीम इंडिया का फुल टाइम कोच बनना जरूरी?

इस साल की शुरुआत में विराट कोहली समेत कई स्टार खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के बावजूद जब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती तो एक ऐसे व्यक्ति की जमकर तारीफ हुई, जो उस दौरे पर किसी भी तरह से जुड़ा नहीं था। उस व्यक्ति का नाम था भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब बल्लेबाजों में से एक राहुल द्रविड़। लेकिन द्रविड़ को उस टेस्ट सीरीज जीत का श्रेय क्यों दिया गया? दरअसल, ऑस्ट्रेलिया का उसकी ही माँद में शिकार करने वाली टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई युवा खिलाड़ियों को द्रविड़ ने ही कोचिंग दी थी।

अब वही ‘द वॉल’ राहुल द्रविड़ भारत के जुलाई में होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया के कोच नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले 2014 में भारत के इंग्लैंड दौरे पर बैटिंग सलाहकार की भूमिका निभा चुके राहुल की ये टीम इंडिया के कोच के तौर पर पहली पारी होगी।

नेशनल क्रिकेट एकैडमी (एनसीए) के प्रमुख का पद संभाल रहे द्रविड़ श्रीलंका के दौरे पर युवा भारतीय टीम को कोचिंग देंगे। उन्हें ये जिम्मेदारी टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री समेत बाकी कोचिंग स्टाफ के उस दौरान टेस्ट सीरीज के लिए टेस्ट टीम के इंग्लैंड में होने की वजह से दी गई है।

भले ही एक सीरीज के लिए ही सही, लेकिन ‘मिस्टर भरोसेमंद’ के टीम इंडिया का कोच बनने से फैंस बेहद खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि ये भविष्य में कोच के तौर पर उनकी लंबी पारी का संकेत है।

द्रविड़ की कोचिंग से टीम इंडिया को मिली युवा खिलाड़ियों की फौज

राहुल द्रविड़ श्रीलंका के दौरे पर अपेक्षाकृत युवा भारतीय टीम को कोचिंग देंगे, जिसे काफी हद तक अंडर-19 और भारत-ए की वह टीम कहा जा सकता है जिसे पिछले कई सालों से खुद राहुल द्रविड़ ने ही कोचिंग दी थी। अंडर-19 और भारत-ए टीम के कोच के तौर पर द्रविड़ का योगदान किसी से छिपा नहीं है। उनकी कोचिंग में भारत 2018 में अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब जीत चुका है।

उनकी कोचिंग में (2016-19) निखरे ये अंडर-19 और ए टीम के क्रिकेटर अब सीनियर टीम इंडिया में भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। फिर चाहे वो ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, मयंक अग्रवाल, पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल, संजू सैमसन, देवदत्त पडिक्कल, ईशान किशान जैसे युवा बल्लेबाज हों या फिर वॉशिंगटन सुंदर, नवदीप सैनी या कमलेश नागरकोटी जैसे बेहतरीन गेंदबाज।

खास बात ये है कि द्रविड़ की कोचिंग में निखरे युवा खिलाड़ी न केवल टीम इंडिया बल्कि आईपीएल में भी अपनी धाक जमा रहे हैं। यानी टेस्ट, वनडे हो या फटाफट क्रिकेट द्रविड़ के शिष्य हर फॉर्मेट में खुद को बीस साबित कर रहे हैं।

टीम इंडिया में पिछले कुछ सालों के दौरान चमकने वाले ज्यादातर युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का श्रेय राहुल द्रविड़ को ही जाता है, जो हर फॉर्मेट के लिए तैयार हैं। खुद इन युवा खिलाड़ियों न केवल अपने खेल में सुधार बल्कि मानसिक मजबूती और मुश्किल समय से उबरने में ‘राहुल सर’ के मंत्र को ही अपना अस्त्र बनाने की बात कही और कामयाब भी रहे।

ऐसे में फैंस की महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ को टीम इंडिया का पूर्णकालिक कोच बनते देखने का सपना अतिश्योक्ति नही है, जो खिलाड़ी युवा टीम को तराशकर प्रतिभाओं का समुद्र तैयार कर सकता है, वो भारतीय टीम को दुनिया की सबसे ताकतवर टीम बनाने में भला क्यों कसर छोड़ेगा। इंटरनेशनल क्रिकेट में 48 शतकों 24 हजार से ज्यादा रन द्रविड़ की महानता की बानगी हैं। पर उससे भी ज्यादा युवा प्रतिभा को पहचानने और तराशने की उनकी क्षमता कमाल की रही है।

कोहली-शास्त्री युग में राहुल द्रविड़ कब टीम इंडिया के कोच बनेंगे, ये कह पाना तो अभी मुश्किल है, लेकिन जिस दिन भी ऐसा हुआ, वो भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी!

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