ज्यादा जुआ खेलने से बढ़ जाता है अकाल मृत्यु का खतरा, शोधकर्ताओं का दावा

शोध में ये पाया है कि ज्यादा जुआ खेलने वालों को आर्थिक समस्याएं ज्यादा होती हैं

शोध में ये पाया है कि ज्यादा जुआ खेलने वालों को आर्थिक समस्याएं ज्यादा होती हैं

शोध में ये दावा किया गया है कि वो लोग जो अपनी महीने की आमदनी का 30 फीसदी जुए में लगा देते हैं, उन लोगों की मरने की संभावना 37 फीसदी तक बढ़ जाती है. ये आंकड़े उम्र और लिंग को मिलाकर जारी किए गए हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 5, 2021, 5:31 PM IST

जुआ (Gambling) खेलने की लत इंसान की जेब पर तो बुरा प्रभाव डालती ही है, इसके साथ-साथ उसके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन को भी बरबाद कर देती है. मगर अब एक स्टडी में ये दावा किया गया है कि जुआ खेलने से अकाल मृत्यु का भी खतरा बढ़ जाता है. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपनी शोध में ये पाया है कि ज्यादा जुआ खेलने वालों को आर्थिक समस्याएं ज्यादा होती हैं और वो बेरोजगार भी बड़ी संख्या में होते हैं.शोध में ये दावा किया गया है कि वो लोग जो अपनी महीने की आमदनी का 30 फीसदी जुए में लगा देते हैं, उन लोगों की मरने की संभावना 37 फीसदी तक बढ़ जाती है. ये आंकड़े उम्र और लिंग को मिलाकर जारी किए गए हैं. इससे शोधकर्ताओं ने ये अंदाजा लगाया कि इस दावे के चलते जहां पहले 10000 में से 59 लोग अकाल मृत्यु का शिकार होते थे तो वहीं ये संख्या बढ़ कर 10000 में से 69 पहुंच गई है. शोधकर्ताओं ने दावा किया कि जो लोग थोड़ा बहुत भी जुए में पैसा लगाते हैं उनके साथ भी कई समस्याएं पैदा होती हैं.

इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने पहले एक बैंक के 10000 बेनाम ग्राहकों के डाटा से पता लगाया कि 2018 में 43 फीसदी ग्राहकों ने किसी तरह के जुए में पैसा लगाया था. एक साल में जुए पर खर्च किया गया मीन एवरेज एक लाख रुपये से अधिक था जबकि मीडियन एवरेज 12 हजार रुपये से अधिक था. बैंक के डाटा से ये भी पता चला कि जुए का ज्यादा अमाउंट होने के कारण क्रेडिट कार्ड का पेमेंट करने में देरी हो जाती है या ओवरड्राफ्ट ज्यादा लेना पड़ जाएगा.

इसके अलावा स्टडी से ये भी पाया गया कि जो लोग गैंबलिंग में ज्यादा पैसे लगा रहे हैं, वो लोग पढ़ाई, स्वास्थ्य आदि जैसी समस्याओं पर बिल्कुल भी निवेश नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा ज्यादा जुआ खेलने वाले लोग कम घूमते-फिरते हैं और सारा पैसा जुए में ही लगा देते हैं. वैज्ञानिक नाओमी मगलटन ने कहा कि ये जानना मुश्किल है कि जुआ खेलने के चलते नकारात्मक रिजल्ट आ रहे हैं या फिर कमजोर लोगों को ही जुए में पैसे लगाने के लिए टार्गेट किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि काफी वक्त से जुआ खिलाने वाली फर्म ने ज्यादा जुआ खेलने वालों को ही टार्गेट किया है. इस शोध में ये भी सामने आया कि सिर्फ ज्यादा जुआ खेलने वाले ही नहीं, कम खेलने वालों के साथ भी कुछ समस्याएं आती हैं.




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