पश्चिम बंगाल: भाजपा के सामने है लोकसभा का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती

रैली में भीड़…
– फोटो : BJP Twitter

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के पहले चरण में शनिवार को कड़ी सुरक्षा और कोविड प्रोटोकॉल के बीच पांच जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। कभी माओवादियों के गढ़ रहे जंगलमहल अंचल क्षेत्र में भाजपा के सामने 2019 के लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। शुभेंदु अधिकारी के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा में शामिल हो जाने से इस अंचल के चुनाव पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

भाजपा व तृणमूल कांग्रेस में सियासी तपिश के बीच जिन पांच जिलों में शनिवार को वोट पड़ेंगे, वे पश्चिम बंगाल के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार हैं। इस क्षेत्र में शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता थे। उनके भाजपा में जाने के बाद यहां तृणमूल कांग्रेस ने छत्रधर महतो पर अधिक भरोसा किया है।

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वह किसी जमाने में प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी के संगठन पुलिस प्रताड़ना प्रतिरोध जनसमिति के नेता रह चुके हैं। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में यहां टीएमसी का दबदबा रहा था, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जंगलमहल अंचल की चारों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करके सबको चौंका दिया था।

पहले चरण की 30 विधानसभा सीटों में से 7 अनुसूचित जनजाति और 4 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। पहले चरण में कुल 191 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है।

इनमें 29 भाजपा, 29 तृणमूल कांग्रेस, 18 माकपा, 6 कांग्रेस, 4 भाकपा और 2 ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के हैं। तृणमूल कांग्रेस ने जॉयपुर से अपने उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने के बाद निर्दलीय को समर्थन दिया है। भाजपा ने एक सीट ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन के लिए छोड़ी है।

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पीएम ने हर जिले में की रैली

प्रथम चरण के लिए चुनाव प्रचार बृहस्पतिवार को थम गया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्रियों व वरिष्ठ भाजपा नेताआें ने जमकर रैलियां कीं। पीएम मोदी ने पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और बांकुड़ा जिलों में एक-एक रैली की।

गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा व अन्य नेताओं की सभाएं व रोड शो भी हुए। तृणमूल कांग्रेस भी प्रचार में पीछे नहीं रही। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने यहां कई रैलियां और रोड शो किए।

पहले चरण में खड़गपुर और मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर ग्लैमर का तड़का लगा हुआ है। मेदिनीपुर से टीएमसी ने वहीं की बाशिंदी अभिनेत्री जून मालिया को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं, झारग्राम से पार्टी ने संथाली समुदाय की अभिनेत्री बीरबहा हंसदा पर दांव लगाया है।

हंसदा का मुकाबला भाजपा नेता सुकुमार सतपति और माकपा उम्मीदवार मधुजा सेन रॉय से है। पुरुलिया जिले की बाघमुंडी सीट पर भाजपा ने ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (एजेएसयू) के आशुतोष महतो को समर्थन दिया है।

उनका मुकाबला कांग्रेस के नेपाल महतो से है। टीएमसी ने बालरामपुर सीट से शांतिराम महतो को उम्मीदवार बनाया है। सालबनी से वाम मोर्चा ने पूर्व मंत्री सुशांत घोष को उतारा हैं। इससे सटे गरबेता से संयुक्त मोर्चा के उम्मीदवार तपन घोष चुनाव लड़ रहे हैं।

  • कुल सीट : 30
  • कुल मतदान केंद्र : 10,288
  • उम्मीदवारों की संख्या : 191
  • मतदाता : 73,80,492
  • सुरक्षा : 659 कंपनियां तैनात

पूर्व मेदिनीपुर जिला : पटाशपुर, कांथी उत्तर, भगवानपुर, खेजुरी, एगरा, रामनगर और कांथी दक्षिण
झाड़ग्राम : बिनपुर, नयाग्राम, गोपीबल्लभपुर, झारग्राम
पश्चिम मेदिनीपुर : मेदिनीपुर खड़गपुर, गड़बेता, केशियरी, सालबनी, मेदिनीपुर, दांतन
पुरुलिया : बर्दवान, बलरामपुर, बाघमुंडी, जयपुर, पुरुलिया, मानबाजार, रघुनाथपुर, पारा, काशीपुर, बांकुड़ा छातना, रानीबांध, रायपुर, सालतोड़ा

प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री शाह ने इन क्षेत्रों में अपनी रैलियों में पानी को बड़ा मुद्दा बनाया। पुरुलिया में पाइप से जल आपूर्ति की योजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में है। पीएम ने 18000 करोड़ की पीएम किसान योजना को लागू करने का भी वादा किया है। उधर, ममता ने यहां अनाज वितरण प्रणाली को और बेहतर करने व दुआरे सरकार (आपके द्वार पर सरकार) कार्यक्रम शुरू किया था। उन्होंने यहां के विकास व अल चिकि भाषा को लोकप्रिय बनाने का वादा किया है।

2016 : तृणमूल को 27 सीट
पहले चरण की 30 सीटों पर 91% मतदाता ग्रामीण व 9% शहरी क्षेत्र के हैं। 2016 के चुनाव में यहां की 27 सीटें टीएमसी ने जीती  थीं। दो सीट कांग्रेस व एक आरएसपी के खाते में गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में चारों सीटें जीतकर भाजपा ने बड़ा उलटफेर किया था। विधानसभा चुनाव में भाजपा का लक्ष्य उसी कामयाबी को दोहराने का है। लोकसभा चुनाव के बाद टीएमसी ने जोहार बंधु योजना जैसी योजनाओं से खोया जनाधार पाने की कोशिश की है। आदिवासी क्षेत्रों में खुद को मजबूत किया है। इसलिए भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है।

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