भारत के इस आइलैंड पर रहती है सबसे ‘खूंखार जनजाति’, जो भी गया पास… नहीं लौटा जिन्दा!

अंडमान के इस आइलैंड पर जाने से सरकार ने पाबंदी लगा दी है. (Photo: News18)

भारत के इस आइलैंड (North Sentinel Island) पर जब भी किसी ने जाने की कोशिश की, वहां की जनजाति से जुड़े लोगों ने उन्हें जिन्दा लौटने का मौका नहीं दिया. इस वजह से सरकार ने लोगों के जाने पर बैन लगा दिया है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 31, 2021, 12:08 PM IST

दुनियाभर में आज भी कई ऐसी जनजातियां मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. ऐसी ही एक जनजाति भारत के अधिकार क्षेत्र में आने वाले नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड (North Sentinel Island) पर रहती है, जिनका आधुनिक मानव सभ्यता से कोई लेना-देना नहीं है. इस जनजाति के लोग इतने ज्यादा आक्रामक और खतरनाक (Most Dreaded Tribe) हैं कि वे किसी को अपने आस-पास फटकने नहीं देते. ऐसे में सरकार ने यहां लोगों के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

सरकार के अलावा, इस ट्राइब को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश कई जागरुक लोगों ने की और उन तक पहुंचने का भी प्रयास किया. वे इस खतरनाक आइलैंड पर भी गए, लेकिन जिन्दा लौटकर नहीं आ सके. बताया जाता है कि जेल से फरार एक कैदी गलती से इस आइलैंड पर पहुंचा तो उसे भी मार दिया गया. साल 2006 में भी दो मछुआरे अपनी नाव समेत भटककर आइलैंड के करीब पहुंचे, तो जान से हाथ धो बैठे. वहीं, सन् 1981 में एक भटकी हुई नाव इस आइलैंड के करीब पहुंची थी, जिन्हें हेलीकॉप्टर भेजकर बचाया गया. उसके मेंबर्स ने बताया कि कुछ लोग किनारों पर तीर-कमान और भाले लेकर खड़े थे. हमारी किस्मत अच्छी थी कि हम वहां से निकलने में सफल रहे.

Sentinel Island tribes
यहां जाने का मतलब है मौत. जिन्दा लौटकर आने की कोई उम्मीद नहीं. (Photo: Reddit)

तूफान में भी खुद को रखे हैं जिन्दासरकार ने कई बार इस आइलैंड के लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन हर बार निराशा ही मिली. सन् 2004 में आई सुनामी के बाद भारत सरकार ने इस द्वीप पर मौजूद लोगों की खबर लेने के लिए सेना का एक हेलिकॉप्टर भेजा था. लेकिन यहां के लोगों ने उस पर भी हमला कर दिया. हवाई तस्वीरों से यह साफ होता है कि ये जनजाति खेती नहीं करती, क्योंकि इस पूरे इलाके में अब भी घने जंगल हैं. इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह जनजाति शिकार पर निर्भर है. बहुत से लोगों का मानना है कि इस जनजाति तक पहुंच बनाई जानी चाहिए. वहीं, कुछ मानते हैं कि उन्हें अपने हाल पर छोड़ देना ही ठीक है.

इस जनजाति के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश हुई, लेकिन इन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया. (Photo: News18)

इस आइलैंड पर रह रहे हैं 60 हजार सालों से

23 किलोमीटर में फैले इस आइलैंड पर ये जनजाति करीब 60,000 सालों से रह रही हैं. ऐसा माना जाता है कि इनकी संख्या कुल 100 के आसपास है. इन लोगों को Lost Tribe भी कहा जाता है. कुछ रिपोर्टों में इसे दुनिया की सबसे अलग-थलग रहने वाली जनजाति करार दिया गया है. यह आइलैंड बंगाल की खाड़ी में पोर्ट ब्लेयर से 50 किलोमीटर दूर स्थित है.








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