लापरवाही: ‘डी’के चक्कर में किसानों को 60 हजार का नुकसान, कृषि समन्वयक को शोकॉज

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बिहारशरीफ8 घंटे पहले

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  • विभागीय डिमांड से अलग कृषि यंत्र की कर दी गई आपूर्ति, भरना पड़ सकता है जुर्माना

कृषि समन्वयकों की लापरवाही का खामियाजा जिले के दस किसानों को भुगतना पड़ा है। इन्हें कृषि यंत्र का अनुदान से वंचित होना पड़ा है। जबकि इनकी जेब से रुपये निकल चुके हैं। यह लापरवाही इतनी भारी है कि विभाग के अधिकारी चाह कर भी किसानों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। विभागीय गाइडलाइन और सिस्टम में फीड कृषि यंत्र का मॉडल इनके आड़े आ जाता है। मात्र डी शब्द के चक्कर में 10 किसानों को करीब 60 हजार का चूना लग गया है।

इस मामले में संबंधित कृषि समन्वयक समेत दुकान संचालक से भी विभाग द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई है। यदि स्थानीय दुकानदार द्वारा जानबूझकर की गई गलती सामने आती है तो किसानों के नुकसान की भरपाई दुकानदारों को ही करनी पड़ सकती है। बता दें कि कृषि यांत्रिकीकरण योजना में विभाग द्वारा यह निर्धारित रहता है कि किस यंत्र के किस मॉडल पर अनुदान दिया जाएगा।

लेकिन दुकानदार के हेराफेरी की अनदेखी कर कृषि समन्वयक द्वारा अनुदान के लिए दिए गए उस आवेदन को भी स्वीकृत कर दिया गया है। जिसमें विभाग की गाइडलाइन से अलग मॉडल की आपूर्ति की गई है। इसका परिणाम यह है कि किसान अनुदान की राशि से वंचित हो गए हैं। जबकि किसान अपना पैसा लगाकर यंत्र की खरीददारी कर चुके हैं। अब इस नुकसान के लिए जवाबदेही तय करने की बात उठ रही।

10 किसानों ने दिया था आवेदन
जिले के 10 किसानों ने पंपसेट के लिए आवेदन किया था। जिसपर प्रति योजना 5950 रुपया अनुदान दिया जाना था। लेकिन दुकानदार और कृषि समन्वयक की अनदेखी के कारण किसानों को अनुदान की राशि वंचित होना पड़ा। सहायक निदेशक ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जाएगी। कंपनी द्वारा इस मॉडल का मैनुफैक्चरिंग है या नहीं, दोनों मॉडल में दुकानदार की बचत क्या है । आदि बिंदुओं पर जांच की जाएगी।

शब्द की हेराफेरी में अटका अनुदान
डीएओ विभु विद्यार्थी ने बताया कि कृषि यंत्र में अनुदान के लिए विभाग द्वारा सभी मानक तय कर पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है ताकि किसान भी समझबूझ कर यंत्र का क्रय करें और समन्वयक भी इसे देखकर जांच करें। 10 किसानों ने पंपसेट के लिए अावेदन किया था। इसके लिए काटे गए परमिट के अनुसार मॉडल नम्बर एसडीएम-41 का पंपसेट क्रय करना था।

लेकिन सिन्हा ट्रेडर्स द्वारा किसानों को एसडीएम-41डी माॅडल दे दिया गया। इतना ही नहीं कृषि समन्वयक द्वारा भी परमिट और बिल का मिलान किए बिना इसे अनुदान के लिए स्वीकृत कर दिया गया। जिला स्तर पर जब इसकी जांच की गई तो गलती पकड़ी गई। समस्या यह है कि यदि जिला से इसे स्वीकृत भी कर दिया जाता है तो पोर्टल पर मॉडल नम्बर स्वीकृत नहीं होगा।

कंपनी ने भी नहीं किया सुधार
सहायक निदेशक कृषि यांत्रिकरण आनंद कुमार ने बताया कि जब अनुदान क्लेम उनके पास आया तो पोर्टल पर मॉडल नम्बर नही दिखा । इसके बाद दुकानदार द्वारा बताया गया कि 4 दिन पहले ही यह मॉडल आना बंद हो गया है। इसके बाद कंपनी द्वारा मॉडल नम्बर सुधार कराने की बात दुकानदार को कही गई। इसके बाद भी मामला एक शब्द को लेकर अटक गया। कंपनी द्वारा इसमें सुधार नहीं किया गया।

पोर्टल पर मॉडल नम्बर एसडीएम-41 अपलोड किया गया। लेकिन इसमें डी शब्द नहीं जोड़ा गया। जिसके कारण मामला और गंभीर हो गया। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि कंपनी द्वारा एसडीएम-41डी मॉडल का पंपसेट तैयार किया जाता है तो डी शब्द को मॉडल के साथ क्यों नही जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभाग द्वारा आवेदन रद्द करने का निर्देश दिया गया है।

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