वाजपेयी के ‘वैष्णव’ कैसे बने मोदी की पसंद, ‘दादा’ की कुर्सी पर 20 साल बाद ज्योतिरादित्य विराजमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले कैबिनेट विस्तार में शपथ लेने वाले मंत्रियों को उनके विभागों का बँटवारा कर दिया गया है। कैबिनेट विस्तार के बाद कई मंत्रियों के विभाग भी बदले गए हैं। बुधवार (07 जुलाई 2021) को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में कुल 43 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की थी। उससे पहले 12 मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था। मोदी सरकार के इस बहुप्रतीक्षित विस्तार के बाद सर्वाधिक चर्चा में देश के नए रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया की है। सिंधिया को वही नागरिक उड्डयन मंत्रालय दिया गया, जो 30 साल पहले उनके दिवंगत पिता माधवराव सिंधिया को मिला था।

वाजपेयी के भी थे चहेते

भारत की लाइफलाइन कही जाने वाली भारतीय रेल और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्रालय की कमान अश्विनी वैष्णव को दी गई है। 1970 में राजस्थान के जोधपुर में जन्मे अश्विनी वैष्णव इलेक्ट्रॉनिक एण्ड कम्युनिकेशन्स में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इसके अलावा उन्होंने IIT कानपुर से M.Tech और अमेरिका की वॉर्टन यूनिवर्सिटी से MBA भी किया है। वैष्णव 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वैष्णव ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा ऑल इंडिया 27वीं रैंक हासिल करते हुए उत्तीर्ण की थी। हालाँकि 2008 में उन्होंने सिविल सेवा से त्यागपत्र दे दिया था और कॉर्पोरेट जगत का रुख कर लिया था। अमेरिका से MBA करने के बाद वैष्णव ने न केवल की नामी-गिरामी कंपनियों में शीर्ष पदों पर काम किया बल्कि गुजरात में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी खोली।

2003 तक वैष्णव ने ओडिशा में अपनी सेवाएँ दी। उसके बाद उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में उपसचिव नियुक्त किया गया था। पद से हटने के बाद वैष्णव, वाजपेयी के सचिव बनाए गए। जून 2019 को वैष्णव भाजपा में शामिल हुए। भाजपा में शामिल होने के बाद भी वैष्णव को ओडिशा की प्रमुख पार्टी बीजू जनता दल का समर्थन प्राप्त हुआ और वे वैष्णव राज्यसभा सांसद चुने गए। वैष्णव एक आंत्रप्रेन्योर रह चुके हैं, ऐसे में भारतीय रेल की कमान उन्हें सौंपना यह बताता है कि मोदी सरकार रेलवे की कमाई बढ़ाने और निजी सार्वजनिक भागीदारी (PPP) के तहत रेलवे के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि भारतीय रेल की कमान एक ऐसे व्यक्ति को दी गई है जो न केवल ब्यूरोक्रैट रह चुका है, बल्कि कार्पोरेट जगत की बारीकियों से भी परिचित है।

पिता के मंत्रालय में बेटे की एंट्री

कभी कॉन्ग्रेस के महत्वपूर्ण (लेकिन हाशिए पर रहने वाले) नेताओं में गिने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को सिविल एविएशन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले सिंधिया ने मध्य प्रदेश में सरकार बनाने में भाजपा की सहायता की। इसका ईनाम भी उन्हें राज्यसभा के रूप में मिला जब मध्य प्रदेश से ही वो राज्यसभा सांसद चुने गए। बुधवार (07 जुलाई) को सिंधिया ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और शपथ लेने के बाद उन्हें मोदी सरकार में सिविल एविएशन मंत्रालय का प्रभार सौंप दिया गया।

यह वही मंत्रालय है जिसकी जिम्मेदारी 30 साल पहले उनके पिता माधवराव सिंधिया को मिली थी। माधवराव सिंधिया 1991-93 के दौरान पीवी नरसिम्हा राव सरकार में सिविल एविएशन और पर्यटन मंत्री रहे थे। माधवराव, राजीव गांधी सरकार में रेल मंत्री के पद भी रहे। इसी तरह उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मनमोहन सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री रह चुके हैं।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान हुए कैबिनेट विस्तार में विविधता के साथ सामंजस्य भी देखने को मिला। मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्वोत्तर भारत के जन-प्रतिनिधियों को भी महत्वपूर्ण पद दिए गए हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र की 25 में से 14 सीटें जीतने वाली भाजपा की सरकार में अब पूर्वोत्तर से कुल 5 मंत्री हो गए हैं। इनमें से 2 कैबिनेट मंत्री हैं जबकि 3 नेताओं को कैबिनेट राज्य मंत्री बनाया गया है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल और किरेन रिजूजू जहाँ कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं वहीं त्रिपुरा से लोकसभा सांसद प्रतिमा भौमिक और मणिपुर से लोकसभा सांसद राजकुमार रंजन सिंह कैबिनेट राज्यमंत्री बने। असम से रामेश्वर तेली पहले ही मोदी सरकार में मंत्री हैं।

Updated: October 1, 2021 — 4:00 am

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