सलमान की काठी, काठी का घोड़ा, घोड़ा पर राजा राहुल गाँधी देव राय वर्मा (प्रथम)

कुछ लोगों के लिए पुण्यतिथि का अर्थ होता है पुण्य कमाने की तिथि! ऐसे लोग औरों की पुण्यतिथि के दिन उन्हें याद करके पुण्य कमा लेते हैं। ऐसी कमाई का मूल सिद्धांत यह है कि मृत व्यक्तियों को याद तो पब्लिक में किया जाता है पर इस प्रक्रिया में कमाया जाने वाला पुण्य अक्सर प्राइवेट रहता है और कमाने वाले के काम आता है। पुण्य की ऐसी कमाई करने वाले भविष्यनिधि जैसा कुछ बनाते हैं और उसे किसी लॉकर टाइप जगह रख लेते हैं। इनका विश्वास इस दर्शन में प्रगाढ़ होता है कि; बड़े आदमी की पुण्यतिथि से जितना पुण्य कमा सको उतना स्टॉक रख लो, पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए।

जिनकी पुण्यतिथि पर ये पुण्य कमाया जाता है उनके घर वालों के पास अक्सर ऐसे लोगों के पुण्य का पूरा हिसाब-किताब रहता है।

बस इस पुण्य कमाने के चक्कर में ये लोग भूल जाते हैं कि इस प्रक्रिया के पब्लिक में होने की वजह से और लोग भी पुण्यतिथि वाले व्यक्ति को अपनी-अपनी तरह से याद करते हैं। सलमान खुर्शीद को ले लें। उन्होंने राजीव गाँधी की पुण्यतिथि से पुण्य कमाने के अपने प्रयास में ट्वीट किया। ट्वीट चीज ही ऐसी है, बस कर दी जाती है। खुर्शीद ने भी कर दिया। उन्होंने ट्वीट के साथ गांधियों की तस्वीर अटैच कर दी। अरे महात्मा और तुषार गाँधी की नहीं बल्कि राजीव और राहुल गाँधी की। साथ ही उन्होंने लिखा; द वन्स एंड फ्यूचर किंग्स ऑफ डेमोक्रेसी।

अर्थात; लोकतंत्र के भूत और भविष्य के राजा।

मैं होता तो यह पोस्ट करने से पहले खुर्शीद साहब से कहता; खुर्शीद साहब, ऐसे कर्म प्राइवेट में किए जाने चाहिए। आपने राजीव जी की पुण्यतिथि पर पुण्य कमाने के लिए पब्लिक में ट्वीट कर दिया, वो भी उन्हें लोकतंत्र का राजा बताते हुए! जरा भी नहीं सोचा कि मौजवादी ट्वीटकार उन्हें याद करते हुए अपनी-अपनी तरह से मजे लेंगे। लोग यह कह कर हँसेंगे कि; देखो तो जरा, ढाई सौ स्पोर्ट्स स्टेडियम इनके नाम पर थे फिर भी हम इन्हें खिलाड़ी की जगह प्रधानमंत्री मानते रहे पर आज पता चला ये राजा थे! कुछ अव्वल दर्जे के मौजवादी तो राजीव जी को लेकर मीम बना सकते हैं और उनका नाम रख सकते हैं ; राजा राजीव गाँधी देव राय वर्मा प्रथम। कोई याद करते हुए कहेगा; यही वो राजा थे जो हमें पंद्रह पैसे देना चाहते थे इसलिए दिल्ली से एक रूपये भेजते थे। भैया जो भी कहो, थे ये बड़े जानकार राजा। इनके गुप्तचर बहुत काबिल थे जो इन्हें बता दिया था कि एक रुपया भेजने पर जनता तक केवल पंद्रह पैसे पहुँचते हैं। इन्हें पता था कि पंद्रह पैसे देना है तो पूरा एक रूपया भेजना ही पड़ेगा नहीं तो जनता दुःखी रहेगी।

खुर्शीद साहब, आपका ट्वीट देखकर गंभीर लोग सोचेंगे; ह्वाट काइंड ऑफ ऑक्सीमोरोन इज दिस? कम ऑन डूड, कौन सी डेमोक्रेसी में राजा होता है? गांधियों की इतनी चमचागिरी करने का क्या है? कॉन्ग्रेस का घणा समर्थक होगा तो सोचेगा; ऐसे चाटुकारों की वजह से ही कॉन्ग्रेस का यह हाल है। जो शैतान बच्चों के जैसे होंगे वे आपको ट्रोल करेंगे। ट्रोल करते आपको वह याद दिलाएँगे जिसमें आपने बताया था कि सोनिया गाँधी पूरे देश की माँ हैं। और ऐसा थोड़ी है कि केवल मौजवादी और कॉन्ग्रेस के समर्थक ही पढ़ेंगे। यही ट्वीट किसी सिख नौजवान के सामने आ गया तो सोचेगा; यही है वो जिसने हमारे दादाजी की हत्या को यह कहकर जस्टिफाई किया था कि; बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।

और तो और, यही ट्वीट डॉक्टर मनमोहन सिंह के सामने से गुजरेगा तो वे पढ़ते हुए सोचेंगे; अजब इंसान था ये। मैं प्लानिंग कमीशन का चेयरमैन था तो मेरी टीम को इसने जोकरों की टीम कहा था। आरिफ मोहम्मद खान देखेंगे तो सोचेंगे; ओहो, आखिर में सलमान ने राज खोल ही दिया। फालतू में लोग वीपी सिंह को राजा साहब कहते थे। तभी मैं सोचूँ कि एक “पिरधानमंत्री” सुप्रीम कोर्ट के ऐसे ऐतिहासिक फैसले को पलटने के लिए संसद से कानून कैसे बना सकता था। अच्छा हुआ मैं कॉन्ग्रेस से निकल गया नहीं तो आज एक राजा के मातहत काम करने के लिए खुद को माफ़ न कर पाता। यही ट्वीट शाह बानो के बच्चे भी देखेंगे और सोचेंगे; एक राजा होते हुए इसने हमारी अम्मी के साथ अन्याय किया।

आपके ट्वीट से लोग राहुल जी के बारे में भी बात करेंगे। कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता अब नारे लगाएँगे; हमारा राजा कैसा हो, राहुल गाँधी जैसा हो। अवार्ड वापसी वाले विद्वान राहुल गाँधी को भविष्य का राजा मानते हुए अब “लोकतंत्र में राजा का महत्व” या “राजा लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है” जैसे टॉपिक पर सेमिनार करेंगे। अरूण पूरी जी इंडिया टुडे के कवर पेज पर “फ्यूचर किंग ऑफ़ द लार्जेस्ट डेमोक्रेसी” हेडलाइन के साथ राहुल जी को छापकर उन्हें फिर से लॉन्च करेंगे। बुद्धिजीवी अब पसंदीदा अखबारों में ; “राहुल शुड एम टू कैप्चर द डेमोक्रेटिक किंगडम ऑफ़ इंडिया इन 2024” जैसी हैडलाइन लिखकर ओपिनियन पीस पब्लिश करवाएँगे। सोनिया जी राहुल को अब दिन भर मेरा पीएम बेटा की जगह मेरा लाजा बेता कहकर दुलारेंगी।

राहुल जी के भी मीम बनेंगे जिनमें उन्हें राजा की पोशाक पहने घोड़े से 7 लोक कल्याण मार्ग पर उतरते हुए दिखाया जाएगा। उनका नाम भी शायद राजा राहुल गाँधी देव राय वर्मा रख दें। वामपंथी दल अब राजशाही को शासन का सबसे अच्छा तरीका बताएँगे ताकि 2024 में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन हो जाए। राहुल जी औपचारिक रूप से अपने भविष्य के लोकतान्त्रिक दरबार के लिए नौ रत्नों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। राहुल जी अंतरराष्ट्रीय विद्वानों से खुद समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, लोकतंत्र, फाइनेंस, सिक्यूरिटी वगैरह सीखते हैं और उसके एवज़ में इन विद्वानों को खुद केवल दर्शनशास्त्र पढ़ा पाते हैं। अब से वे इन विद्वानों को राजशाही के पाठ भी पढ़ा सकेंगे। कॉन्ग्रेस की पहले से बनी टूलकिट के उद्देश्य के बारे में लिखा जाएगा; प्रिपेयर्ड फॉर हिज हाईनेस राहुल गाँधी, द फ्यूचर किंग ऑफ द डेमोक्रेसी ऑफ इंडिया !

बस एक ही समस्या है। प्रधानमंत्री बनने की तैयारी में राहुल जी ने वर्षों की कड़ी मेहनत की है। अब किंग बनने के लिए मेहनत शुरू से न शुरू करनी पड़ जाए।

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