2001 में अलताबाड़ी से कटकर गांगी बनी पंचायत

किशनगंज। 2001 में अस्तित्व में आई गांगी पंचायत भौगोलिक व जनसंख्या के दृष्टिकोण से प्रखंड का सबसे छोटी पंचायत है। अलताबाड़ी पंचायत से कटकर यह पंचायत बनी थी। उस समय पंचायत की आबादी महज तीन हजार के आसपास थी, जो अब बढ़कर करीब आठ हजार तक पहुंच चुकी है। 10 वार्डों वाली इस पंचायत में लगभग 5200 मतदाता हैं। साक्षरता दर 63 फीसद के आसपास बताया जा रहा है। लगभग छह वर्ग किलोमीटर में फैले इस पंचायत में लगभग 2500 परिवार निवास करते हैं। अधिकांश लोग खेती किसानी पर ही निर्भर हैं। हालांकि कुछ परिवार गांगी हाट में व्यवसाय कर जीवन यापन करते हैं।

विकास के इस दौर में भी कई समस्याएं मुंह बाए खड़ी है। चाहे वह किसानों के लिए सिचाई की बात हो या बेहतर स्वास्थ्य सेवा की या फिर शिक्षा व्यवस्था की। सिचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश किसान निजी व्यवस्थाओं पर ही निर्भर होकर खेती करने को विवश हैं। जबकि विभाग की ओर से गांगी पंचायत में दो स्टेट बोरिग की व्यवस्था वर्षों पूर्व की गई थी। दोनों बोरिग ठीक तो है परंतु पानी सप्लाई वाला पाइप लाइन ध्वस्त हो जाने के कारण कुछ ही ग्रामीणों को इसका लाभ मिलता है। अन्य किसानों को निजी स्तर से सिचाई की व्यवस्था कर खेती करना मजबूरी बन गई है। राहगीरों की सुविधा को मद्देनजर रखते हुए वर्षों पूर्व गांगी पंचायत के गांगी हाट में एक रैन बसेरा का निर्माण कार्य करवाया गया था। जो अब पूरी तरह से अतिक्रमित हो चुका है। रैन बसेरा की जगह कुछ दुकानें खोल दी गई है।

पंचायत में स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो पूरे पंचायत में एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। वर्तमान समय में इस केंद्र में चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति अब तक नहीं की हो पाई है। ग्रामीणों ने बताया कि एएनएम के भरोसे किसी तरह अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जा रहा है। वह भी सप्ताह में शायद एक या दो दिन केंद्र आती है। जिस कारण लोगों को इलाज हेतु 12 किलोमीटर की दूरी तय कर बहादुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है अन्यथा किसी निजी चिकित्सकों से इलाज करवाना पड़ता है। साथ ही साथ स्वास्थ्य केंद्र के आगे पड़ी खाली जमीन को भी कुछ लोगों के द्वारा अतिक्रमित कर लिया गया है।

कूड़ा उठाव की नहीं है व्यवस्था पंचायत में जगह-जगह डस्टबिन रखे गए हैं। हालांकि नियमित साफ-सफाई व कूड़ा उठाव की व्यवस्था नहीं की गई है।

नहीं है पशु अस्पताल पंचायत क्षेत्र में मवेशी अस्पताल नहीं है। इस कारण यहां के पशुपालकों को मवेशियों के इलाज के लिए प्रखंड मुख्यालय स्थित मवेशी अस्पताल जाना पड़ता है। गांगी हाट में सुविधाओं का है अभाव गांगी हाट में बुनयादी सुविधाओं का घोर अभाव है। जल निकासी समेत अन्य सुविधाएं नहीं होने के कारण व्यवसायियों व फुटकर विक्रेताओं सहित हाट-बाजार आने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

नहीं है पंचायत सरकार भवन

गांगी में पंचायत सरकार भवन का अब तक निर्माण नहीं हो पाया है। वर्षों पूर्व बनाए गए पंचायत भवन में कामकाज हो रहा है, लेकिन पंचायतस्तरीय जरूरतों की पूर्ति के लिए ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। ओडीएफ है पंचायत पंचायत में शौचालय का निर्माण कराया गया है। इस प्रखंड को सबसे ओडीएफ पंचायत घोषित किया गया था। इसका लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है।

नहीं लगाई गई हैं स्ट्रीट लाइटें गांवों में स्ट्रीट लाइट की कमी खल रही है। जिस कारण शाम ढलते ही अंधेरा कायम हो जाता है। चौक-चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग ग्रामीणों द्वारा लगातार की जा रही है। ग्रामीणों की राय पंचायत क्षेत्र में हर घर नल का जल योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाया है। पंचायत क्षेत्र की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने की आवश्यकता है। विकास की बात करें तो विगत पांच वर्षों में गांगी पंचायत में काफी विकास हुआ है। गांगी हाट में आमजनो के लिए सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था भी कर दी गई है। -रामप्रसाद मल्लाह पंचायतवासियों का जीविकोपार्जन का मुख्य साधन खेती व व्यवसाय है। पहले अलताबाड़ी पंचायत का ही हिस्सा थी, लेकिन 2001 में गांगी को अलग पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ। जब यह पंचायत बनी तब गांगी हाट के बीचोंबीच कनकई नदी का बहाव हुआ करता था। सड़क के चारों तरफ बड़े-बड़े गड्ढ़े थे। यहां हर घर नल का जल योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। अधिकांश वार्डों में अब तक ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नसींब नहीं हो पाया है। जिस कारण आए दिन यहां के लोग पेट संबंधित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार की जरूरत है। स्थानीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। – मो. सहिदुर रहमान

विगत पांच वर्षो से पंचायत में विकास तो हुआ है लेकिन ग्रामीणों की सुविधा को मद्देनजर रखते हुए अभी और भी काम किया जाना बाकी है। वार्ड संख्या एक, तीन, आठ, नौ व दस में नल का जल ग्रामीणों को नसीब नहीं हो पाया है। पंचायत में सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है, परंतु रात के अंधेरे से बचाव हेतु स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत है। बिजली की आंख मिचौली से ग्रामीण त्रस्त हैं। – अशोक कुमार चौपाल

पंचायत में विगत पांच वर्षों में कई गुना अधिक विकास संबंधित कार्य हुआ है। पंचायत के निर्माण के बाद से अब तक पंचायत सरकार भवन निर्माण नहीं हो पाना, बड़ा सवाल है। गांगी पंचायत पूरे बहादुरगंज प्रखंड में सर्वप्रथम ओडीएफ घोषित किया गया। पंचायत क्षेत्र के अधिकांश गांव में सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मरम्मतीकरण का भी प्रस्ताव लिया जा चुका है। – नेहाल परवेज, प्रखंड प्रमुख

मुखिया का दावा – मुखिया मो. मुजाहिदुल इस्लाम उर्फ लड्डन ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में लगभग सभी जगहों पर सात निश्चय योजना, मुख्यमंत्री गली नली योजना एवं मनरेगा योजना के तहत सड़कों का जाल बिछाया गया है। अन्य पंचायतों की तुलना में गांगी पंचायत विकास के मामले में काफी आगे है। पूरी कोशिश रहेगी कि आगे भी ग्रामीणों की भरसक सेवा की जा सके। ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना एवं अन्य सरकारी योजनाओं से भी लाभ दिलाने का भरपूर कार्य किया जा रहा है। शौचालय निर्माण के साथ-साथ जगह-जगह डस्टबिन लगाकर स्वच्छ पंचायत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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