By | May 16, 2020
चार साल से ऐंड्रॉयड में छिपा 'खतरनाक

ऐंड्रॉयड में छिपा ‘खतरनाक’ वायरस, स्मार्टफोन मैलवेयर और वायरस आए दिन सामने आते हैं और कंपनियां उन्हें फिक्स भी कर देती हैं लेकिन ऐंड्रॉयड से जुड़े सबसे खतरनाक मैलवेयर का पता पूरे चार साल बाद लग पाया है। यह स्पाईवेयर इतना ज्यादा खतरनाक था कि अपना काम और सारा डेटा चोरी करके गायब भी हो सकता था। अब तक इसकी मदद से हजारों यूजर्स को शिकार बनाया जा चुका है।

चार साल से ऐंड्रॉयड में छिपा 'खतरनाक

ऐंड्रॉयड में छिपा ‘खतरनाक – ऐंड्रॉयड एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है और इसका फायदा कई बार हैकर्स को मिल जाता है। ओपन सोर्स होने के चलते इसकी फाइल्स में बदलाव कर ओएस या इसकी स्किन को कस्टमाइज किया जा सकता है और हैकर्स खतरनाक मैलवेयर भी इसमें छुपा सकते हैं। एक ऐसे वायरस का पता चला है, जो बिना यूजर को पता चले उसका डिवाइस कंट्रोल कर सकता था। स्मार्टफोन का पूरा कंट्रोल लेने वाला यह मैलवेयर कई साल से

हजारों फोन्स में छुपा था।

साइबर सिक्यॉरिटी रिसर्चर Bitdefender के मुताबिक, Mandrake नाम का यह स्पाईवेयर दरअसल ऐंड्रॉयड फंक्शंस का गलत इस्तेमाल करता था और डिवाइस का सबकुछ अपने कब्जे में ले लेता था। अटैक करने के बाद यह वायरस यूजर से जुड़ी हर जानकारी जुटा लेता था और यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती थी। अटैक करने वाला डिवाइस पर कलेक्ट किया गया सारा डेटा देख सकता था। चौंकाने वाली बात यह है कि Mandrake साल 2016 से ऐक्टिव था और अब जाकर इसका पता चल सका।

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फोन स्क्रीन करता था रिकॉर्ड

शुरुआत में यह वायरस केवल ऑस्ट्रेलिया में यूजर्स पर अटैक कर रहा था और अब यूरोप-अमेरिका
समेत सारी दुनिया में इसकी मदद से हजारों डिवाइसेज को हैक किया जा रहा है। यह कितना
खतरनाक है इसी से समझा जा सकता है कि बिना यूजर को पता चले यह वायरस उसकी स्क्रीन
पर होने वाली सारी ऐक्टिविटी रिकॉर्ड कर लेता था। वहीं, जीपीएस की मदद से यूजर की लोकेशन
तक का डेटा आसानी से चोरी-छिपे अटैकर तक पहुंच जाता था। इतना ही नहीं, वह आसानी से
बैकिंग ऐप्स में डाले गए डीटेल्स और पासवर्ड्स भी चोरी कर सकता था।

हजारों-लाखों बने होंगे शिकार

कंपनी की ओर से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वायरस पिछले चार साल से ऐक्टिव है, ऐसे में
दसियों हजार या लाखों यूजर्स इसका शिकार बनाए जा चुके होंगे। Mandrake को अटैकर खास
तौर पर विक्टिम के डिवाइस में पहुंचाता था और इसकी मदद से डेटा और डिवाइस का कंट्रोल धीरे-
धीरे उसे मिल सकता था। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि इसे गूगल प्ले स्टोर की मदद से कुछ
ऐप्स के साथ डिवाइसेज में पहुंचाने की कोशिश भी की गई, लेकिन ऐसे सभी ऐप्स को प्ले स्टोर से
हटा दिया गया है।

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यूजर को नहीं लगती थी भनक

सामने आए वायरस से जुड़ा सबसे खतरनाक पहलू यह है कि काम पूरा होते ही इस मैलवेयर को
किल किया जा सकता था और यह डिवाइस से डिलीट हो जाता था। इस तरह अटैकर एक बार
ऐंड्रॉयड डिवाइस पर अटैक कर सारा डेटा चोरी कर सकता था और काम खत्म होते ही इस मैलवेयर
को डिवाइस से गायब कर सकता था। इस पूरी प्रक्रिया में यूजर को पता ही ना चलता कि उसके
डिवाइस को हैक किया गया या फिर उसका डेटा चोरी किया जा चुका है। यूजर्स को केवल प्ले स्टोर
से ही ऐप्स डाउनलोड करने की सलाह दी जाती है।

One Reply to “चार साल से ऐंड्रॉयड में छिपा ‘खतरनाक’ वायरस बिना पता चले यूजर कि स्क्रीन होती थी रिकॉर्ड”

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