By | May 3, 2020
शहरी कामगारों के समक्ष रोजगार छिनने जैसी हालात ला दी है।

शहरी कामगारों के समक्ष Rojgar छिनने जैसी हालात ला दी है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार बढ़ाने की संभावना तलाशी जा रही है

शहरी कामगारों के समक्ष रोजगार छिनने जैसी हालात ला दी है।

कोरोना संकट ने एक ओर जहां शहरी कामगारों के समक्ष रोजगार छिनने जैसी हालात ला दी है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार बढ़ाने की संभावना तलाशी जा रही है। लोगों की स्किल मैपिंग की जा रही है। फिलहाल क्वारंटाइन अथवा होम क्वारंटाइन में रह रहे लोगों की स्किल मैपिंग की जा रही है। इसके जरिए ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण इलाके के युवाओं, मजदूरों की रोजगार से संबंधित सोच को समझने में लगी हुई है। गांव के लोग किस तरह का काम करने में रुचि रखते हैं, उन्हें किन चीजों की जरूरत होगी। किस तरह से उन्हें उनके पसंद का रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। कैसे उन्हें उस रोजगार के लायक ट्रेंड किया जाएगा। इन सारी जरूरतों को ध्यान में रखकर स्किल मैपिंग की जा रही है।

जानकार बताते हैं कि आने वाले महीनों में देश की अर्थव्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ेगी। गया जैसे जिलों से हजारों मजदूर जो दूसरे प्रदेशों में वर्षो तक काम करते रहें उनके पास तरह-तरह के हुनर हैं।
जरूरत है उन निपुणता को अपने यहां जमीन पर उतारने की। इससे इन मजदूरों को भविष्य में पलायन भी रुकेगा।

303 पंचायतों में काम कर रहे

22 हजार 447 मनरेगा मजदूर

जिले में लॉकडाउन अवधि में मजदूरों को काम मिलते रहे इसकी कवायद तेज कर दी गई है।
डीआरडीए से मिली जानकारी के मुताबिक 303 पंचायतों में मनरेगा मजदूरों ने काम करना शुरू कर दिया है। मनरेगा से जुड़ी 958 योजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं। ये सभी कच्चा वर्क हो रहा है।
वहीं, इन मजूदरों में 242 अप्रवासी मजदूर भी काम कर रहे हैं। ]

बाहरी मजदूरों को मिलेगा

लॉकडाउन की वजह से गया में फंसे हुए बाहरी मजदूरों को भी मनरेगा से काम दिलाया जाएगा।
प्रशासन ने इस तरह की व्यवस्था की है। जॉब कार्ड के बगैर भी आवेदन करने वाले ऐसे मजदूरों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। पंचायतों में पंचायत रोजगार सेवक या प्रखंड में प्रोग्राम अफसर को आवेदन दे सकते हैं।

बायोटेक किसान हब योजना से खेसारी दाल उत्पादन की मिलेगी ट्रेनिंग

बायोटेक किसान हब योजना के अंतर्गत पटना, लखीसराय एवं गया जिलों के किसानों को खेसारी दाल उत्पादन के लिए विशेष जानकारी प्रदान की गई है। कोरोना संकट के कारण पलायन से लौटे युवकों के लिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग लॉकडाउन के बाद वृहद रूप से शुरू की जाएगी। इस बारे में कृषि मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है। अभी से ही इसकी तैयारी करने को कहा है।

र्गी पालन को बढ़ावा देने

समेकित मुर्गी विकास योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस योजना से बीपीएल व एपीएल दोनों ही परिवारों को लाभ दिया जाएगा।
इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में अंडा उत्पादन इकाइयां खोलने, डेयरी,
फूलों-फलों की खेती के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही है।

इसके साथ ही भेड़-बकरी पालन के लिए भी लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इन सभी योजनाओं में अनुदान की व्यवस्था की गई है। मनरेगा मजदूरों को काम दिलाने के लिए
अधिकांश पंचायतों में काम शुरू कर दिया गया है।
इसके साथ ही नल-जल व गली नली योजना भी क्रियान्वित कराई जा रही है।
जिले में तकरीबन 22 हजार मजदूर इन दिनों काम कर रहे हैं।

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