Twitter के MD मनीष माहेश्वरी खेल रहे हैं लुका-छिपी का खेल: कर्नाटक HC में यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार (9 जुलाई, 2201) को कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। यूपी पुलिस की ओर से कोर्ट में कहा गया कि माहेश्वरी को नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद उनको पुलिस के सामने पेश होकर सवालों के जवाब देने चाहिए लेकिन वो ऐसा नहीं करके लुका-छिपी खेल रहे हैं।

यूपी पुलिस के वकील ने अदालत से कहा कि मनीष माहेश्वरी ट्विटर इंडिया के प्रमुख हैं, उन्हें सहयोग करते हुए हमारे सामने पेश होना चाहिए। इस पर माहेश्वरी के वकील ने अदालत में कहा कि 18 जून से वो लगातार कह रहे हैं कि उनका मुवक्किल सिर्फ ट्विटर का एक कर्मचारी है, वो एमडी नहीं हैं। इस पर यूपी पुलिस के वकील ने कहा कि अगर ऐसा है तो मनीष माहेश्वरी को उनके सामने पेश होना चाहिए और बताना चाहिए कि वह ट्विटर इंडिया के एमडी नहीं हैं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले को 13 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है। 13 जुलाई को ही अदालत अपना आदेश सुनाएगी।

बता दें कि राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट और दाढ़ी काटने की घटना के वीडियो से जुड़े मामले में पुलिस ट्विटर इंडिया समेत कई लोगों पर मामला दर्ज किया है। इसी मामले में मनीष माहेश्वरी को पुलिस ने समन जारी किया है। ट्विटर इंडिया एमडी मनीष माहेश्वरी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में गाजियाबाद पुलिस की ओर से सेक्शन 41ए के तहत मिले नोटिस को चुनौती दी है।

गाजियाबाद में एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक बुजुर्ग के साथ मारपीट और उनकी दाढ़ी काटते दिखे थे। इस वीडियो को शेयर किए जाने से जुड़े मामले में ही ट्विटर समेत कई लोगों पर पुलिस ने मामला बनाया है। इसी मामले में गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर इंडिया के एमडी को नोटिस भेज पूछताछ के लिए बुलाया है।

गौरतलब है कि मनीष माहेश्वरी ने गुरुवार (8 जुलाई, 2021) को कर्नाटक हाई कोर्ट से उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से जारी नोटिस को रद्द करने का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति जी नरेंद्र की एकल पीठ के समक्ष माहेश्वरी की ओर से पेश हुए वकील सीवी नागेश ने दलील दी कि सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत नोटिस बिना अधिकार और बिना कानूनी मंजूरी के जारी किया गया। 

उन्होंने दावा किया कि पहला नोटिस सीआरपीसी की धारा 160 के तहत 17 जून को जारी किया गया था। वकील ने दलील दी कि सीआरपीसी की धारा 160 के तहत कानूनी दायित्व उस व्यक्ति पर आधारित है जो उस स्थान पर रहता है जो उस थाना क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आता है जहाँ अपराध दर्ज किया गया है। नागेश ने कहा कि धारा 160 के तहत नोटिस जारी होने के बाद माहेश्वरी ने जाँचकर्ताओं को बताया कि उन्हें इस मामले के बारे में कुछ भी नहीं पता है। उन्होंने कहा कि अगर माहेश्वरी उनके सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हो भी जाते हैं तो भी उनका जवाब वही रहेगा। 

उल्लेखनीय है कि यूपी पुलिस ने ट्विटर इंडिया के MD महेश महेश्वरी को 24 जून 2021 को 10:30 बजे तक गाजियाबाद के लोनी थाना में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। 24 जून को, उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश में, गाजियाबाद पुलिस को महेश महेश्वरी के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने से रोक दिया।

Updated: October 1, 2021 — 8:41 am

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